भरी महफिल में कोना चाहता था
वो मैं तकिया भिगोना चाहता था
दु'आओं में जिसे माँगा था मैं ने
उसे मैं फिर से खोना चाहता था
मुसीबत में जो मुझ पे हँस रहे हैं
मैं उन के साथ रोना चाहता था
अधूरे हैं बहुत से ख़्वाब मेरे
वगरना अब मैं सोना चाहता था
— Akash Rajpoot















