देखो कैसे बैठा है
इक दम पागल जैसा है
जाने क्या क्या सोचे है
खोया खोया रहता है
सब को अच्छा लगता है
सब को धोका देता है
बाहर ख़ुश ख़ुश दिखता है
भीतर रोता रहता है
कैसा ये पागलपन है
ख़ुद को पागल कहता है
कभी कभी तो लगता है
मर जाना ही अच्छा है
— Aqib khan
इक दम पागल जैसा है
जाने क्या क्या सोचे है
खोया खोया रहता है
सब को अच्छा लगता है
सब को धोका देता है
बाहर ख़ुश ख़ुश दिखता है
भीतर रोता रहता है
कैसा ये पागलपन है
ख़ुद को पागल कहता है
कभी कभी तो लगता है
मर जाना ही अच्छा है
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