चल रहे हैं साथ में लेकर उदासी
जान ले लेता है ये मंज़र उदासी
जिस क़दर इस
में मैं अब डूबा हुआ हूँ
कह भी सकते हो मुझे पैकर उदासी
क्या हुआ गर ख़ुशियाँ हिस्से में नहीं तो
ख़ुश रहो ना मिल रही भर-भर उदासी
आ न जाना ग़म को मेरे दूर करने
देख लेने दो ज़रा जी कर उदासी
मैं अकेला हूँ तिरा हट जाऊँ मैं भी?
पड़ रही हो गर तुझे कमतर उदासी
एक तो हम तेरे ग़म में मुब्तला हैं
है ज़माने भर की भी उसपर उदासी
हम किसे बतलाएँ अब अपनी उदासी
बोलती है चढ़ के अब हर सर उदासी
अच्छा तुम जाओ किसी के साथ हूँ मैं
पकड़े बैठी है मुझे कसकर उदासी
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