क्या एक भी तुम को भाता था - २

बात बस कुछ यूँ है
कि एक मुद्दत से
शे'र नहीं कहा गया
शे'र नहीं सुना गया
बस एक ख़याल
जो मन में बुन रहा था
वो कुछ कुछ इस तरह था
की वो ख़त जो तेरे नाम लिखे
वो बातें जो तेरे हक़ में हैं
वो शे'र जो तेरी खिदमत में
मैं अब तक सब को सुनाता था
सच-सच कहना उन
में से क्या
एक भी तुम को भाता था?

— Alankrat Srivastava

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