akela jo raha har-dam kisi ka ho nahin saktaa | अकेला जो रहा हर-दम किसी का हो नहीं सकता

  - Amaan Pathan

अकेला जो रहा हर-दम किसी का हो नहीं सकता
भले हो मुस्तक़िल गर्दिश मगर वो रो नहीं सकता

हसीन इतनी है तू ज़ौक़-ए-नज़र तो बन गया हूँ मैं
मगर दिल की कियारी में नया कुछ बो नहीं सकता

संभल जा दिल ये क्या सपने बुने जाता है तू दिन रात
मिलेगा क्या तुझे वो सोचकर जो हो नहीं सकता

कहा जो कृष्ण ने गीता में रक्खेगा अगर तू याद
भले जितना घना जंगल हो पर तू खो नहीं सकता

  - Amaan Pathan

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