है सब कुछ याद पर उन से मोहब्बत है न जाने क्यूँँ

पड़ी मेरे गले फिर से ये आफ़त है न जाने क्यूँ

बस इक झुमका भी यूँ तो होश सबके छीन लेता है
मगर उन को दिखावे की इक आदत है न जाने क्यूँ

मुझे वो छोड़ जाएगी मेरा दिल तोड़ जाएगी
बुरा सपना था कल तक अब हक़ीक़त है न जाने क्यूँ

मुझे तो देखने की भी मनाही है परायों को
उन्हें सीने लगाने की इजाज़त है न जाने क्यूँ

है सब कुछ ठीक घर में और सेहत भी सही है फिर
मुझे दिन रात अजब सी एक अज़िय्यत है न जाने क्यूँ

मेरे पैरों में छाले हैं मेरी आँखों में पानी है
मुझे फिर भी मोहब्बत है मोहब्बत है न जाने क्यूँ

— Amaan Pathan

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