मिलन का इक बहाना चाहता हूँ
तेरे ख़्वाबों में आना चाहता हूँ
यही ख़्वाहिश है मैं पल्लू में तेरे
घड़ी अपनी फँसाना चाहता हूँ
मुझे दिल के किसी कोने में रख लो
मैं तुम को याद आना चाहता हूँ
नया सा दिल बना कर दे मुझे जो
इक ऐसा कार-ख़ाना चाहता हूँ
जो मेरे पास आना चाहते हैं
उन्हीं से दूर जाना चाहता हूँ
— Amaan Pathan















