और फिर उस ने कहाँ सब भूल जाना
ये मगर बोला नहीं कब भूल जाना
याद वो बे-इंतिहा आने लगा था
जिस दफ़ा उस ने कहाँ अब भूल जाना
इक तरफ़ बारिश में तेरी याद आना
इक तरफ़ हैं ख़ुश्क दो लब भूल जाना
चाहते हो गर मदद मुफ़्लिस की करना
याद रखना अपना मज़हब भूल जाना
हर इबादत में जिसे माँगा हैं तुझ से
हैं बड़ा मुश्किल उसे, रब भूल जाना
— Amol















