
ये फ़ासला ज़रूर है मगर ये फ़ैसला नहीं
सो बेबसी में कह रहा हूँ मैं कोई गिला नहीं
मैं देर रात कमरे में ये सोच कर के आया हूँ
अब इस के बा'द और कोई रास्ता बचा नहीं
— Armaan khan
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