इल्ज़ाम एक ये है चराग़ों के नाम पर

परवाने मर रहे हैं उजालों के नाम पर

बेचैनियाँ है बढ़ रहीं मन भी उदास है
आती नहीं है नींद भी ख़्वाबों के नाम पर

वा'दा किया गया था सितारों की सैर का
जुगनू चमक रहे है सितारों के नाम पर

है फूल और भी यहाँ ख़ुश्बू लिए मगर
बाग़ों में तितलियां है गुलाबों के नाम पर

ग़ज़लों में उड़ रही हैं अदब की यूँ धज्जियाँ
क्या-क्या लिए हैं लफ़्ज़ रदीफ़ों के नाम पर

दो ग़ज़ ही तुम को चाहिए उतनी ही बस मुझे
लड़ते है फिर भी लोग ज़मीनों के नाम पर

ख़ामोश हैं कहीं तो कहीं मौत हो गई
क्या कुछ नहीं हुआ है रिवाजों के नाम पर

— Avinash Joshi

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Udasi Shayari

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