लगा था ये उसे मुझ से मुहब्बत थी
हक़ीक़त में उसे तो सिर्फ़ आदत थी
तुम्हारी याद जाने अब कहाँ है जो
मिरे दिल में कहीं कल तक सलामत थी
रहा ख़ामोश मैं रिश्ता बचाने को
मुझे तुम से कई ज़्यादा शिकायत थी
गया हैं उम्रभर का ज़ख़्म दे कर वो
कभी जिस की मिरे दिल पर हुकूमत थी
बहुत सोचूँ अगर तो याद आता है
मुझे शायद कभी तुम से मुहब्बत थी
उठा जिस ख़्वाब से डर कर अचानक मैं
हक़ीक़त में वही मेरी हक़ीकत थी
— Ayush Gupta














