
ईंट पत्थर की हो या लकड़ी की या मिट्टी की
रहगुज़र कैसी भी हो फूल कुचल जाता है
हर ज़बाँ रहती है माहौल-ए-मुहब्बत में ख़मोश
ग़ुस्से में होती है तो कुछ भी निकल जाता है
— Ayush Aavart
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