हर शख़्स और सब दिल उदासी के हैं शिकार
इनको ख़बर न ग़ाफ़िल उदासी के हैं शिकार
दरिया तो दरिया हैं कि इन्हें क्या मलाल है
जितने हैं देख साहिल उदासी के हैं शिकार
ग़म चाहिए अजीब तलब है इन्हें भी अब
आए हैं यार साइल उदासी के हैं शिकार
यूँ भी उदास बज़्म नज़र आ रही है दोस्त
वो जो हैं सद्र-ए-महफ़िल उदासी के हैं शिकार
बोलें हँसें कि आँख न नम हो ज़रा मियाँ
ऐसा तो करना मुश्किल उदासी के हैं शिकार
इश्क़-ओ-फ़िराक़ का न जिन्हें इल्म है ज़रा
ऐसे भी यार जाहिल उदासी के हैं शिकार
राहत मिले इन्हें कि अब आज़ार में फ़क़त
आरिज़ अज़ीज़ कामिल उदासी के हैं शिकार
— Azhan 'Aajiz'















