इस ज़मीं की तह में हम तुम वो हमारे जाएँगे

देर से या जल्द सब के सब उतारे जाएँगे

हम बिगाड़े जाएँगे गोया सँवारे जाएँगे
हर तरह के मौसमों से हम गुज़ारे जाएँगे

सिर्फ़ इनता सोच कर इस को झटकते ही नहीं
आस्तीं से निकले जितने साँप मारे जाएँगे

डाल कर इक्सीर में हम दोस्त बातों की यहाँ
सोने-चाँदी की तरह ऐसे निखारे जाएँगे

वक़्त रहते अब अना से ख़ुद उतर ही जाइए
फिर वगरना आप रुस्वा कर उतारे जाएँगे

नाम अपना है नहीं जुगनूँ तलक में भी अभी
आरज़ू ये हम चराग़ों में पुकारे जाएँगे

इल्म है हाँ किस तरह तड़पा के मारा जाएगा
शहर से उस के गली से हम गुज़ारे जाएँगे

नफ़रतों की बोलियाँ तुम मत सिखाओ यूँ इन्हें
होएगा तन्हा फ़लक तोड़े जो तारे जाएँगे

तुम अभी वाक़िफ़ नहीं तक़दीर के इस खेल से
हम डुबो कर सागरों में फिर उभारे जाएँगे

है अभी ख़ामोश दरिया इस
में हलचल हो कोई
आएगा तूफ़ाँ सफ़ीने फिर किनारे जाएँगे

देख वो आए न आए फ़ैसला उस का मगर
हम पुकारे जाएँगे उस को पुकारे जाएँगे

आ गया इन के सहारे इस तरफ़ 'आरिज़ अज़ीज़'
बे-सहारे किस तरफ़ किस के सहारे जाएँगे

— Azhan 'Aajiz'

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