ke bekason ke gamon ka nahin sahaara koi | के बेकसों के ग़मों का नहीं सहारा कोई

  - Azhar

के बेकसों के ग़मों का नहीं सहारा कोई
कतार में हो अगर तुम, नहीं तुम्हारा कोई

इसी गली से अभी गुज़रे होके तन्हा हम
इसी गली में कभी होता था हमारा कोई

जहाँ इनाम मिले तेरा मख़मली बोसा
वहाँ मुक़ाबले में हार कर न हारा कोई

हुई जो सुब्ह पहुँचे दफ़्तरों की जानिब सब,
मुलाज़मत में फँसे और न है चारा कोई

असीर-ए-ग़म हैं मियाँ जाएँ हम किधर जाएँ
हमें तो दर्दस लगता नहीं है प्यारा कोई

किसी ने पूछ लिया हिज्र के मसाइल का
बिना हवा के करे जैसे बस गुज़ारा कोई

  - Azhar

Kiss Shayari

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