rakeeboon ki kahii baato pe jhat se faisla karke | रकीबों की कही बातो पे झट से फैसला करके

  - Azhar

रकीबों की कही बातो पे झट से फैसला करके
कहो अब क्या हुआ हासिल यूँँ हमको अलविदा करके

तुम्हारी भी ये सारी आदतें बच्चो के जैसी हैं
जो मकतब में कभी आते नहीं हैं दाख़िला करके

वो लौटेंगे उजालो में ज़रा सी देर तो ठहरो
मोहब्बत से पुकारा है अभी तो हौसला करके

अगर ये फलसफा है 'इश्क़ में शिकवा नहीं जायज़
न जाने कितनी रातें कट गई ख़ुद से गिला करके

कहानी में तेरे किरदार को अब हम निभाऐगें
चले जाओ है गर जाना हमें यूँँ मुब्तला करके

  - Azhar

Ulfat Shayari

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