Azhar
Ghazal

रकीबों की कही बातो पे झट से फ़ैसला कर के

कहो अब क्या हुआ हासिल यूँ हम को अलविदा कर के

तुम्हारी भी ये सारी आदतें बच्चो के जैसी हैं
जो मकतब में कभी आते नहीं हैं दाख़िला कर के

वो लौटेंगे उजालो में ज़रा सी देर तो ठहरो
मोहब्बत से पुकारा है अभी तो हौसला कर के

अगर ये फलसफा है इश्क़ में शिकवा नहीं जायज़
न जाने कितनी रातें कट गई ख़ुद से गिला कर के

कहानी में तेरे किरदार को अब हम निभाएँगे
चले जाओ है गर जाना हमें यूँ मुब्तला कर के

— Azhar

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