रकीबों की कही बातो पे झट से फैसला करके
कहो अब क्या हुआ हासिल यूँँ हमको अलविदा करके
तुम्हारी भी ये सारी आदतें बच्चो के जैसी हैं
जो मकतब में कभी आते नहीं हैं दाख़िला करके
वो लौटेंगे उजालो में ज़रा सी देर तो ठहरो
मोहब्बत से पुकारा है अभी तो हौसला करके
अगर ये फलसफा है 'इश्क़ में शिकवा नहीं जायज़
न जाने कितनी रातें कट गई ख़ुद से गिला करके
कहानी में तेरे किरदार को अब हम निभाऐगें
चले जाओ है गर जाना हमें यूँँ मुब्तला करके
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Azhar
our suggestion based on Azhar
As you were reading Ulfat Shayari Shayari