उसे अपना बनाना चाहता थायही सारा ज़माना चाहता थाअब इक तस्वीर बनकर रह गया हूँहमेशा मुस्कुराना चाहता थाबस इक ज़रिया थी मेरी ख़ुद-कुशी जाँमैं उस का दिल दुखाना चाहता थाक़ज़ा से डर नहीं लगता है लेकिनज़रा बस शायराना चाहता थाजो लड़का रह गया मुनकिर ही होकरख़ुदा तुम को बनाना चाहता था— Ashutosh Kumar "Baagi"