sakhiyon sang rangne ki dhamki sunkar kya dar jaaunga | सखियों संग रंगने की धमकी सुनकर क्या डर जाऊँगा

  - Kumar Vishwas

सखियों संग रंगने की धमकी सुनकर क्या डर जाऊँगा
तेरी गली में क्या होगा ये मालूम है पर आऊँगा

  - Kumar Vishwas

Dar Shayari

Our suggestion based on your choice

    वही मंज़िलें वही दश्त ओ दर तिरे दिल-ज़दों के हैं राहबर
    वही आरज़ू वही जुस्तुजू वही राह-ए-पुर-ख़तर-ए-जुनूँ
    Noon Meem Rashid
    24 Likes
    तेरे दर पर तेरी ख़ातिर बता ना
    हमें रोना पड़े, अच्छा लगेगा?
    Atul K Rai
    53 Likes
    दिया जला के सभी बाम-ओ-दर में रखते हैं
    और एक हम हैं इसे रह-गुज़र में रखते हैं

    समुंदरों को भी मालूम है हमारा मिज़ाज
    कि हम तो पहला क़दम ही भँवर में रखते हैं
    Read Full
    Abrar Kashif
    47 Likes
    मैं बार बार तुझे देखता हूॅं इस डर से
    कि पिछली बार का देखा हुआ ख़राब न हो
    Shaheen Abbas
    36 Likes
    हुनर से काम लिया पेंट ब्रश नहीं तोड़ा
    बना लिया तेरे जैसा ही कोई रंगों से

    मुझे ये डर है कि मिल जाएगी तो रो दूँगा
    मैं जिस ख़ुशी को तरसता रहा हूँ बरसों से
    Read Full
    Rahul Gurjar
    ख़ौफ़ आता है अपने साए से
    हिज्र के किस मक़ाम पर हूँ मैं
    Siraj Faisal Khan
    22 Likes
    हुस्न ने शौक़ के हंगामे तो देखे थे बहुत
    इश्क़ के दावा-ए-तक़दीस से डर जाना था
    Asrar Ul Haq Majaz
    26 Likes
    तमाम शहर को तारीकियों से शिकवा है
    मगर चराग़ की बैअत से ख़ौफ़ आता है
    Aziz Nabeel
    18 Likes
    तेरे दर से जब उठ के जाना पड़ेगा
    ख़ुद अपना जनाज़ा उठाना पड़ेगा
    Khumar Barabankvi
    35 Likes
    तो क्या उसको मैं होंठों से बजाऊँ
    तिरे दर पे जो घंटी लग गई है

    चराग़ उसने मिरे लौटा दिए हैं
    अब उसके घर में बिजली लग गई है
    Read Full
    Fahmi Badayuni
    45 Likes

More by Kumar Vishwas

As you were reading Shayari by Kumar Vishwas

    दिल के तमाम ज़ख़्म तेरी हाँ से भर गए
    जितने कठिन थे रास्ते वो सब गुज़र गए
    Kumar Vishwas
    46 Likes
    मुद्दतें गुज़र गयी 'हिसाब' नहीं किया
    न जाने अब किसके कितने रह गए हम
    Kumar Vishwas
    271 Likes
    बात करनी है बात कौन करे
    दर्द से दो दो हाथ कौन करे

    हम सितारे तुम्हें बुलाते हैं
    चाँद न हो तो रात कौन करे

    अब तुझे रब कहें या बुत समझें
    इश्क़ में ज़ात-पात कौन करे

    ज़िंदगी भर की थे कमाई तुम
    इस से ज़्यादा ज़कात कौन करे
    Read Full
    Kumar Vishwas
    55 Likes
    बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं
    प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
    Kumar Vishwas
    139 Likes
    चारों तरफ़ बिखर गईं साँसों की ख़ुशबुएँ
    राह-ए-वफ़ा में आप जहाँ भी जिधर गए
    Kumar Vishwas
    39 Likes

Similar Writers

our suggestion based on Kumar Vishwas

Similar Moods

As you were reading Dar Shayari Shayari