ज़बरदस्ती नहीं अच्छी, मुहब्बत चीज़ प्यारी है

पिता से हाथ माँगो यार, वो लड़की कुँवारी है

लतीफ़े तुम सुनाओ लाख, पर इक बात भी मानो
तुम्हारे सब लतीफों पर, ये सच्चा शे'र भारी है

नहीं करता शरारत मैं, मेरा पर मन नहीं माना
उसे बस देखने के बा'द, मैं ने आँख मारी है

सुनो छुप कर मिलो बेचैन से, तुम से है कुछ कहना
तुम्हें जितनी है, उतनी ही, हमें भी बेकरारी है

— Sarthak Bechen

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Haseen Shayari

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