इंसानियत की जब भी कभी जुस्तजू करोतो दीन की गली से किनारा शुरू करोमहँगाई में किफ़ायती है शौक़ ये बड़ाबैठे बिठाए कोई नई आरज़ू करोनुस्ख़ा ये ख़ुद-कुशी का बड़ा कार-गर मियाँजो भी कहे ज़माना वही हू-ब-हू करो— Beybaar