प्यास हूँ सहरा की मैं, इक बूँद पानी चाहिएया गुमाँ रखने को दरिया की निशानी चाहिएभूल जाने के उसे, क़िस्से बहुत से याद हैंयाद करने को मगर कोई कहानी चाहिए— Beybaar