मुझे सच बताओ कि प्यासा कहाँ था
वहाँ तो नहीं था जहाँ पर कुआँ था
चिता जल रही थी जहाँ पर वहाँ तुम
सभी को बताते हो क्यूँ बस धुआँ था
जिसे छोड़कर तुम यहाँ आ गए हो
खड़ा है वहीं तुम ने छोड़ा जहाँ था
ज़मीं भी समझता नहीं जो मुझे अब
कभी वो तो मेरे लिए आसमाँ था
थमेगा नहीं अब ये अश्कों का सागर
मरा है अभी जो वो लड़का जवाँ था
— Swapnil Srivastava 'Bhola Lucknowi'















