siskate shor ko mire chhupata hai akelapan | सिसकते शोर को मेरे छुपाता है अकेलापन

  - Bhoomi Srivastava

सिसकते शोर को मेरे छुपाता है अकेलापन
मुझे मिलने मिरे घर रोज़ आता है अकेलापन


कि बातूनी बहुत हूँ मैं पता है उस को अच्छे से

तभी तो देर तक गप्पे लड़ाता है अकेलापन
कमी खलने लगे जब भी किसी अपने की मुझ को तो

बदलना उन सभी का फिर दिखाता है अकेलापन
मनाता है हँसाता है मुहब्बत भी जताता है

करे क्या क्या अकेला थक ही जाता है अकेलापन
चलेगा कब तलक ऐसे बता लड़की ज़रा मुझ को

कोई होगा ही तेरा जो भगाता है अकेलापन

  - Bhoomi Srivastava

Aurat Shayari

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