hidaayat hain inaayat hain masarrat hain s | हिदायत हैं इनायत हैं मसर्रत हैं सभी औरत

  - Bhoomi Srivastava

हिदायत हैं इनायत हैं मसर्रत हैं सभी औरत
मगर फिर भी ज़माने में सियासत हैं सभी औरत

रिवायत ख़त्म होगी एक दिन पर्दों की दुनिया में
बदल देगी रिवायत को क़यामत हैं सभी औरत

कभी माँ की निग़ाहों में कभी बहनों की सूरत में
नज़र आए तो दुनिया की सदाक़त हैं सभी औरत

समझते आ रहे हैं जो अभी तक दाग़ औरत को
नहीं समझे वो रब की ही अमानत हैं सभी औरत

नहीं कहती कि हर इक मर्द में बसती ख़राबी है
अगर मर्दों में दिल है तो सलामत हैं सभी औरत

  - Bhoomi Srivastava

Khuda Shayari

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