ye sheeshe men nazar aati agar soorat tumhaari hai | ये शीशे में नज़र आती अगर सूरत तुम्हारी है

  - Bhoomi Srivastava

ये शीशे में नज़र आती अगर सूरत तुम्हारी है
ज़रा इसको सँवारो तुम कि ये ताक़त तुम्हारी है

जहाँ में कौन ऐसा है जिसे दुश्मन से उल्फ़त हो
तुम्हीं ऐसी सियानी हो यही फितरत तुम्हारी है

कभी तो रू-ब-रू ख़ुद से हो फ़ुर्सत में शफ़क़ज़ादी
कि जो तुम में मुरव्वत है ग़ज़ब आदत तुम्हारी है

गले से आ रही आवाज़ को तुमने दबाया क्यूँ
हमें मालूम है कुछ बोलना हसरत तुम्हारी है

ख़बर है क्या तुम्हें तुम हो किसी तावीज़ के जैसी
मिली जो ख़ैरियत सबको फ़क़त रहमत तुम्हारी है

  - Bhoomi Srivastava

Awaaz Shayari

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