tasuvvur men meraa jisse taalluq dil | तसुव्वर में मेरा जिस सेे तअल्लुक़ दिल्लगी का है

  - Bhoomi Srivastava

तसुव्वर में मेरा जिस सेे तअल्लुक़ दिल्लगी का है
हक़ीक़त में उसी से वास्ता फिर दोस्ती का है

हमारी दास्ताँ में भँवरा है वो और मैं गुल हूँ
तो ज़ाहिर है कि वो मेरे अलावा भी किसी का है

मुझे उसकी ख़ताएँ इसलिए दिलचस्प लगती हैं
मुझे पकड़े हुए है एक जिन जो आशिक़ी का है

तरीक़े थे कई सारे उसे यूँँ रोक लेने के
मगर मेरे लिए तो मसअला उसकी ख़ुशी का है

समझती हूँ जिसे अपना उसी से फिर जुदा होना
लगे ऐसे कि लम्हा आख़िरी ये ज़िंदगी का है

  - Bhoomi Srivastava

Dost Shayari

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