मेरा बख़्त ऐसे सँवारा किसी नेख़राबों में ढूँढा निखारा किसी नेमेरी जान बिल्कुल निकल ही गई जबमेरी जान कह कर पुकारा किसी नेतेरे हिज्र में क्या तुझे इल्म भी हैमह-ओ-साल कैसे गुज़ारा किसी ने— Divyanshu Tiwari SAHIL