ग़ज़ल बन रही है दुआ दीजिए
गिले शिकवे दिल से भुला दीजिए
हमारी वजह से परेशाॅं हैं गर
मेरी जान हम को बता दीजिए
यहाँ लाऍं हैं आप मुझ को तो फिर
मुझे बैठने की जगह दीजिए
अगर मैं गुनहगार हूँ तो मुझे
जो भी दिल में आए सज़ा दीजिए
— DEEPAK CHATURVEDI
गिले शिकवे दिल से भुला दीजिए
हमारी वजह से परेशाॅं हैं गर
मेरी जान हम को बता दीजिए
यहाँ लाऍं हैं आप मुझ को तो फिर
मुझे बैठने की जगह दीजिए
अगर मैं गुनहगार हूँ तो मुझे
जो भी दिल में आए सज़ा दीजिए
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