फ़क़त चेहरा भला मैं देखता रहता
बता तू क्या बुरा मैं देखता रहता
ये दुनिया को गिरा मैं देखता रहता
मैं इतना ही बुरा मैं देखता रहता
हुआ बे-ध्यान तो निगला समंदर ने
किनारा था भरा मैं देखता रहता
बहुत सारे सवालों से था बच्चा व्यग्र
सवालों से भरा मैं देखता रहता
मजूरों को है क़िल्लत पेट भरने की
किसानों को मरा मैं देखता रहता
लगा है कारख़ाना लाल उन्नति का
कभी जंगल हरा मैं देखता रहता
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