ho jab sarkaar bhi qudrat ki mohtaaj | हो जब सरकार भी क़ुदरत की मोहताज

  - "Dharam" Barot

हो जब सरकार भी क़ुदरत की मोहताज
बनी पब्लिक भी तब रहमत की मोहताज

नहीं होती ख़ुशी दौलत की मोहताज
हो जाती है ख़ुशी क्यूँ लत की मोहताज

बनाया एक घर इंसान ने जब
थी चिड़िया पिंजरे में पर छत की मोहताज

नई सरकार में पेपर हुए लीक
नई है तो नहीं है मत की मोहताज

कहो मत कुछ भी घूमों साल भर पास
वो आहिस्ता से होगी ख़त की मोहताज

हो अच्छे काम थोड़े आप से भी
धरम तक़दीर भी बरकत की मोहताज

  - "Dharam" Barot

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