पिया जिसने पता है ज़हर का दुख
नया होता नए से शहर का दुख
कहानी सिर्फ़ पढ़ने को है अच्छी
जिन्होंने झेला समझे क़हर का दुख
हवा अब गाँव की लगती जुदा है
यहाँ तक देखो पहुँचा शहर का दुख
समंदर पाँव तक होता सही है
रहे है उसके ऊपर लहर का दुख
नया शायर ये जाने है ब-ख़ूबी
बताएगा है क्या ये बहर का दुख
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