हर अदा उसकी लगे पेचीदगी है
देख वो ऐसे रही आवारगी है
ख़्वाब का हर एक सौदा ज़िंदगी है
माँगे बिन कुछ तुम करो वो बंदगी है
साफ़ तो बस ये हवेली ही दिखेगी
रहने वालो में बसी जो गंदगी है
उसपे मेकअप ये लगा अच्छा बड़ा पर
ख़ूबसूरत लगती उसकी सादगी है
बोल तू कुछ भी सुनेगा तेरा तो कौन
लोकशाही में यहीं आज़ादगी है
याद का रिश्ता निभाओ तो सही तुम
'इश्क़ में रहती यही परवानगी है
कोख में गिरने न दे वो बेटी कोई
मर्द की तो बस यही मर्दानगी है
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