कर गई रुसवाई हर इक काम मेरे
क्यूँ घटाए आपने भी दाम मेरे
ये लिखा सब वास्ते है आपके ही
कुछ भी हो जाए बुरा फिर नाम मेरे
झूठ से पर्दा उठाते और हर इक
काम करते पार सच में राम मेरे
वास्ते आवाज़ मेरे जब उठाई
सिर ले सकता आपके इल्ज़ाम मेरे
पढ़ रहे हैं और ये मालूम होता
फिर न इक भी भेजता पैगाम मेरे
लोकशाही में यही लाइन है आसिर
लोग रहते साथ में हर-गाम मेरे
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