मिलना है रद्दी को भी कोई ख़रीदार
बेचना आसान है ख़ुद को मेरे यार
ख़ुद की नैया ख़ुद किनारे तक ले जाओ
चाहिए ख़ुद पर भरोसा होने को पार
बैठ कर आराम से खो जाए कोई
आपको लगना यही है हो गया प्यार
कम न आँकें आप औरत को कभी भी
शिव की ताक़त में मिलेगा शक्ति का सार
माँ को देखा जूझते जब घर चलाते
छोड़ कर जाना पड़ा बच्चे को घर बार
हो रही है सौ मी मेरी ये ग़ज़ल फिर
लोग क्यूँ कहते धरम शा'इर नहीं यार
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