milnaa hai rad | मिलना है रद्दी को भी कोई ख़रीदार

  - "Dharam" Barot

मिलना है रद्दी को भी कोई ख़रीदार
बेचना आसान है ख़ुद को मेरे यार

ख़ुद की नैया ख़ुद किनारे तक ले जाओ
चाहिए ख़ुद पर भरोसा होने को पार

बैठ कर आराम से खो जाए कोई
आपको लगना यही है हो गया प्यार

कम न आँकें आप औरत को कभी भी
शिव की ताक़त में मिलेगा शक्ति का सार

माँ को देखा जूझते जब घर चलाते
छोड़ कर जाना पड़ा बच्चे को घर बार

हो रही है सौ मी मेरी ये ग़ज़ल फिर
लोग क्यूँ कहते धरम शा'इर नहीं यार

  - "Dharam" Barot

Aawargi Shayari

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