mere alaava tumko jee paana hai kya | मेरे अलावा तुमको जी पाना है क्या

  - "Dharam" Barot

मेरे अलावा तुमको जी पाना है क्या
जी भर गया है मुझ सेे कुछ ऐसा है क्या

हूँ मैं तुम्हारा ये कभी माना है क्या
मानो मुझे अपना कभी रोका है क्या

वो याद में है साथ लगता था फ़क़त
पर साथ कोई 'इश्क़ में होता है क्या

उम्मीद भी नाराज़गी बन जाती है
अपना किसी को मानना धोखा है क्या

ख़ुद ख़ुद से आगे बढ़ने में ही है मज़ा
औरों से तुमको हो जलन अच्छा है क्या

बच्चा बड़ा हो जाता है इक 'उम्र बाद
बच्चा है इक भीतर रखा ज़िंदा है क्या

अंबर करेगा पैरवी बनकर ज़मीं
होंगे हरे हर खेत तब सोचा है क्या

दिल तोड़ कर चाहत सुकूँ की थी 'धरम'
दिल तोड़ कर मिलता सुकूँ देखा है क्या

  - "Dharam" Barot

Mehndi Shayari

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