मेरे अलावा तुमको जी पाना है क्या
जी भर गया है मुझ सेे कुछ ऐसा है क्या
हूँ मैं तुम्हारा ये कभी माना है क्या
मानो मुझे अपना कभी रोका है क्या
वो याद में है साथ लगता था फ़क़त
पर साथ कोई 'इश्क़ में होता है क्या
उम्मीद भी नाराज़गी बन जाती है
अपना किसी को मानना धोखा है क्या
ख़ुद ख़ुद से आगे बढ़ने में ही है मज़ा
औरों से तुमको हो जलन अच्छा है क्या
बच्चा बड़ा हो जाता है इक 'उम्र बाद
बच्चा है इक भीतर रखा ज़िंदा है क्या
अंबर करेगा पैरवी बनकर ज़मीं
होंगे हरे हर खेत तब सोचा है क्या
दिल तोड़ कर चाहत सुकूँ की थी 'धरम'
दिल तोड़ कर मिलता सुकूँ देखा है क्या
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