उसका यूँँ सब छोड़ जाना, ठीक है क्या?
फिर अकेले मुस्कुराना, ठीक है क्या?
बात जो अब तक छुपाई है सभी से
अब वही सबको बताना, ठीक है क्या?
याद में उसकी ग़ज़ल जो इक कही थी
वो ग़ज़ल उसको सुनाना, ठीक है क्या?
रिश्ते जैसे भी हो, रहने दो, उन्हें यूँँ
एक इक करके मिटाना, ठीक है क्या?
ज़िंदगी का तजरबा तो कर लो पहले
यूँँ अभी से हार जाना, ठीक है क्या?
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