लगी बद-दुआ किस की किस ने सज़ा दी
मोहब्बत में मैं ने अना तक गँवा दी
करूँ मैं यहाँ अब शिकायत भी किस से
हुआ ख़ुद ही बर्बाद ख़ुद ही रज़ा दी
लिया हाथ में ख़त पढ़े हर्फ़ सारे
थी बातें वो झूठी सो सारी जला दी
बताना नहीं हाल मेरा किसी को
तसव्वुर में मैं ने जवानी बिता दी
तरसता रहा उस की क़ुर्बत को ता-'उम्र
मोहब्बत ने ज़ालिम फ़क़ीरी दिखा दी
सितम से है जिस के भरी मेरी ग़ज़लें
उसे छोड़ मैं ने है सब को सुना दी
— Divu















