Divu
Divu
Ghazal

नया है शहर लाज़िम है मिलेंगे चाहने वाले

है मुमकिन देखते होंगे तुझे सब देखने वाले

पुराने लोग हैं हम रूह पाने की तमन्ना है
मुहब्बत ले न जाऍं जिस्म को ये चूमने वाले

गँवाया है बहुत कुछ पहले भी सो डर रहा है मन
यहाँ तो दर-ब-दर दिखते हैं सारे लूटने वाले

जमाल-ए-हुस्न की ता'रीफ़ लाज़िम है ये माना पर
लगे है झूठ जब करते हैं लानत फेंकने वाले

मिलो हँस कर नए से पर पुराने लोग रखना साथ
लगा कर आग देखेंगे तमाशा देखने वाले

— Divu

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