Divu
Divu
Ghazal

यादों का कारवाँ रिहाई नहीं देता

कोई भी अब हसीन दिखाई नहीं देता

तुम और मैं अब क़रीब न हों तो बेहतर है
फिर क्यूँ दिल को मिरे जुदाई नहीं देता

कई हकीमों से मिल कर देखा मैं ने
कोई इस मर्ज़ की दवाई नहीं देता

तू जन्मदिन पे रातों को जगने वाला
ऐसी भी क्या अना जो बधाई नहीं देता

तुम तो क़रीब से समझा करते थे मुझे
क्या अब ख़ामोश लब सुनाई नहीं देता

— Divu

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