बहार-ए-इश्क़ इन दिनों मरा तो था कोई
किसी के साथ मेरा राबता तो था कोई
फिर उसके बाद क्या हुआ पता नहीं मुझे
यही है याद बस गले लगा तो था कोई
उस एक लम्हे में किसी ने तो नहीं रखा
वगरना दरमियान दायरा तो था कोई
ख़ुदा तुझे ये दुख अता करे के तू कहे
तुम्हारे साथ एक मरतबा तो था कोई
सखी मुझे दुबारा 'इश्क़ हो नहीं सका
मुझे तुम्हारे जैसा भी मिला तो था कोई
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