jiye jaane ka ye zariya nahin hai | जिए जाने का ये ज़रिया नहीं है

  - Gopesh "Tanha"

जिए जाने का ये ज़रिया नहीं है
मोहब्बत धूप है, साया नहीं है

मिरे हिस्से क्या ग़म आया नहीं है
बहुत झेला है पर गाया नहीं है

तुम्हें ये जच गई, तुमको मुबारक
हमारे काम की दुनिया नहीं है

शिकायत रह गई तो सिर्फ़ इतनी
कि जो चाहा था वो पाया नहीं है

जो मालिक बन रहे हैं उन सेे कह दो
किसी के बाप की दुनिया नहीं है

समझ कर खेलना तुम ज़िंदगी से
मियाँ ये आग है, दरिया नहीं है

बिछड़ जाए जो तू तो क्या है बाकी
तिरा जो साथ है तो क्या नहीं है

मुझे तुम भी परख कर देखते हो
ये "तन्हा" आम है, अमिया नहीं है

  - Gopesh "Tanha"

Bhai Shayari

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