यार आने का बहाना छोड़ दे
रोज़ मुझ को तू सताना छोड़ दे
मैं तिरे अंदाज़ से वाकिफ़ हूँ जाँ
सो मुझें पागल बनाना छोड़ दे
तू मुहब्बत की क़सम दे के मुझें
बात सब अपनी मनाना छोड़ दे
कब तलक हम डर के साए में जियें
तू हमें अब से डराना छोड़ दे
और तुझ से चाहता मैं कुछ नहीं
बस मुझें तू याद आना छोड़ दे
यूँ न हो तेरा दीवाना एक दिन
हार कर सारा जमाना छोड़ दे
सोचिए उस घर का क्या होगा अगर
घर का इकलौता कमाना छोड़ दे
— Govind kumar















