ज़ख़्म गहरा नहीं के तुम से कहें
दिल भी करता नहीं के तुम से कहें
दर्द को ज़ब्त कर के बैठ गए
हम से होता नहीं के तुम से कहें
हम ने तो पूछना नहीं जो सुना
तुम ने कहना नहीं के तुम से कहें
आँख से आँसू ही तो निकला है
कोई दरिया नहीं के तुम से कहें
वैसे दिल करता है के तुम से कहूँ
मेरा बनता नहीं के तुम से कहें
मुक़्तसर वक़्त ले के आए हो
वरना क्या क्या नहीं के तुम से कहें
— Gulfam Ajmeri















