dil ye meraa zaraa chain paata nahin | दिल ये मेरा ज़रा चैन पाता नहीं

  - Hasan Raqim

दिल ये मेरा ज़रा चैन पाता नहीं
शक़्स वो जब कभी मुस्कुराता नहीं

मैं उसे याद करते को थकता नहीं
और मैं ही उसे याद आता नहीं

दूरियों का सबब ही यही है की मैं 'इश्क़ करता हूँ उसको बताता नहीं

नींद आँखों में आने को है मुंतज़िर
मंज़र-ए-हिज्र आँखों से जाता नहीं

क्या सितम है की वो याद आता भी है
और वो ही कभी यार आता नहीं

कौन सुनता है किसके ग़मों को यहाँ
इसलिए ग़म किसी को सुनाता नहीं

  - Hasan Raqim

Ishq Shayari

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