kahii ek roz jo unse nazar mil jaa.e achha ho | कहीं एक रोज़, जो उन सेे नज़र मिल जाए, अच्छा हो

  - Hasan Raqim

कहीं एक रोज़, जो उन सेे नज़र मिल जाए, अच्छा हो
सुकूं इस दिल को भी मेरे अगर मिल जाए अच्छा हो

है इतनी तो ख़बर, वो रहने वाले किस शहर के हैं
कि बस अब सैकड़ों में, उनका घर मिल जाए, अच्छा हो

वो बनकर हम सेफर गर, चल दिये मेरी ही राहों को
कभी न खत्म हो ऐसा सफर मिल जाए, अच्छा हो

हाँ, वैसे तो उन्हे मालूम है सब कुछ मगर, राक़िम
तेरी चाहत की भी, उनको ख़बर मिल जाए, अच्छा हो

  - Hasan Raqim

Akhbaar Shayari

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