"वो"
कुछ ऐसा रो'ब था उस का तमाम लोगों पर
लबों से निकली हर इक बात उस की चलती थी
वो जिस की आँच से तूफ़ान ख़ौफ़ खाता था
वो एक लौ जो हवाओं के साथ जलती थी
कभी हवा की तरह हाथ ही नहीं लगती,
कभी वो बर्फ़ सी हाथों में आ पिघलती थी
दिलों को उस ने सभी के यूँ घेर रक्खा था
कि उस की बात ही हर बात पर निकलती थी
मुसीबतों में सभी रास्ता बदलते थे,
मगर वो थी जो मेरे साथ-साथ चलती थी
अब उस के बा'द ये हालात हैं तो लगता है,
कि उस के साथ मुलाक़ात एक ग़लती थी
— Hasan Raqim















