तस्वीर इक जला के बुझाता रहा हूँ मैंउस के ही पास लौट के जाता रहा हूँ मैंये ना-तमाम ख़्वाब हक़ीक़त हों किस तरहहर पल तो अपनी नींद उड़ाता रहा हूँ मैं— Hasan Raqim