तू सलामत रहे और रहे पुर-सुकूँ, तेरी मिट्टी करोड़ों की है आबरूइस ज़मीं के हैं हम इसमें मिल जाएँगे, पर रहेगा हमेशा वतन मेरे तू— Hasan Raqim