
तेरा दीदार करना हो हमें तो कैसे मुमकिन हो
भले हो साथ तस्वीर-ए-ख़याली तेरी लेकिन हो
अधर यूँ मौन रख कर बस हमें सुनती रहोगी क्या
कभी तस्वीर हाल-ए-दिल कहे ऐसा भी इक दिन हो
— Hemant Sakunde
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