फूल से धूप का राब्ता हो गया
ज़िंदगी ख़ुश-नुमा तजरबा हो गया
अजनबी शहर से सामना जब हुआ
आप के साथ का हौसला हो गया
इक ग़ज़ल से ज़रा रू-ब-रू क्या हुए
उम्र भर का सफ़र मसअला हो गया
तुम वहाँ हिज्र में क्या से क्या हो गए
मैं यहाँ हिज्र में क्या से क्या हो गया
तेरी मौजूदगी का असर ये हुआ
मुझ को भी जीने का हौसला हो गया
— Ajay Kumar















